पत्रकारिता देश का चौथा स्तम्भ

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  • जावेद खान वाराणसी

देश के चौथे स्तम्भ की स्थापना दिवस पर देश के सभी पत्रकार बंधुओं को प्रेस दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

पत्रकारिता ,जिसमें हर तबके के व्यक्ति जिनकी बात नीचे के अधिकारियों से ले कर उच्चपद के अधिकारी भी न सुने, हर तरफ से मायूस लोगो की उम्मीद होती देश का चौथा स्तम्भ कि उनकी बात अब हर कोई सुनेगा व पढ़ेगा

पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जिसमे आपको सिर्फ शौहरत ओर मजलुमो की दुवाएँ ही मिलती इनके पास सिर्फ कलम होती जिसे वो अपनी आँखों देखी ,कानो सुनी,व किसी व्यक्ति की परेशानियों को अपने शब्दों में लिख कर चाहे वो देश की वीवीआईपी हो,प्रशासन के उच्च अधिकारी व आम जन मानस हो सबके पास खबर पहुँचाना और उसके इंसाफ के लिये लड़ता

आज के भोतिक्ता वाले परिवेश में ऐसे भी पत्रकारों से सामना होता जिनके पास सिर्फ उनकी ईमानदार पत्रकारिता ही उनकी पूंजी होती जो किसी भी मजलूम को न्याय दिलाने में अपना स्वत्रं झोंक देते रात हो या दिन स्थितिया विकट हो या स्वत्रंर पत्रकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती गली,गली व मोहल्ले,मोहल्ले वो एक एक खबर जुटाता ओर उनको अपने शब्दों में पिरो अख़बार बनाता
भले आज के परिवेश के हिसाब से उसके पास महंगी गाड़िया मोबाईल, व घड़ियां नही पर उसके पास सुकून रहता कि वो भी समाज के उनलोगों की आवाज है, उनका भरोसा है जिह्वे कोई नही सुनता

वो देश का चौथा खम्बा है जिसकी आवाज़ को हर कोई सुनता और सुनेगा

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