न्यूजीलैंड से कोटला में होने वाले मैच से पूर्व सचिन के साथ बीते पलों की यादें

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  • सचिन दरिया दिल वाला खिलाडी है।
  • सचिन के साथ यादें।
  • न्यूजीलैंड से कोटला में होने वाले मैच से पूर्व सचिन के साथ बीते पलों की यादें।

विजय कुमार ( नई दिल्ली,24 अप्रैल,2020) : बात उन दिनों की है जब सचिन भारतीय टीम के कप्तान थे, और न्यूजीलैंड टीम भारतीय दौरे पर आई हुई थी। दिल्ली के फीरोजशाह कोटला मैदान पर एक दिवसीय मैच खेला जाना था। इस मैच की तैयारी के लिए भारतीय टीम को पालम मैदान पर अभ्यास करना था। वह भी सुबह के सत्र में क्योंकि न्यूजीलैंड को दोपहर के स़त्र में अभ्यास के लिए आना था।

तब टीवी मीडिया का अगमन नहीं हुआ था। वहीं कोई भी पत्रकार किसी को कोई खबर बताता नहीं था, वो भी क्रिकेट की। अन्य खेलों की जानकारी भले ही कोई आपसे बांट ले। मगर क्रिकेट को लेकर ऐसा ना के बराबर ही होता था। यहीं नहीं संचार व्यवस्था भी सीमित ही हुआ करती थी। एमटीएनएल के फोन से ही अधिकतर लोग खबरें या जानकारी पता करते थे। बीसीसीआई से तो कोई बात करता था तो वही केवल पीटीआई के रिपोर्टर। उन्हीं से पता चलता था कि टीमें कब अभ्यास करेगी और कप्तान कब मीडिया से बात करेंगे। क्योंकि तब स्टेट एसोसिएशन के लोग भी ज्यादा कुछ टीम के बारें में जानकारी नहीं दिया या रखा करते थे।
उन दिनों लगभग यह पक्का हुआ करता था कि जो टीम अभ्यास करती है। वह अभ्यास के उपरांत मीडिया से और दूसरी टीम अभ्यास से पूर्व बात करती थी। अक्सर यहीं हुआ भी करता था। लेकिन उस दिन हुआ यूं कि भारतीय टीम का अभ्यास सुबह था और कुछ लोगों को जानकारी नहीं मिल पाई कि सचिन तेन्दुलकर सुबह ही मीडिया से बात करेगें। यह जानकारी मीडिया को मुंबई के एक पत्रकार ने पहुंचाई थी। ऐसे में मीडिया के काफी लोग सुबह के समय पालम मैदान पर पहुंच गए और सचिन तेन्दुलकर ने मीडिया से बात कर ली।
मगर मेरे सहित चार अन्य रिपोर्टर जब करीब 11 बजे पालम मैदान पर पहुंचे तो पता चला कि सचिन ने मीडिया से बातचीत कर ली है, ओर अब वह बात नहीं करेंगे। यह जानकारी मुझे दिल्ली में सचिन के साथ रहने वाले दीपे ने बताई थी। दीपा दिल्ली में सचिन का साजो सामान से लेकर होटल तक सारा कार्य करता था।
मेेरे सहित उन चार रिपोर्टरों में दो अग्रेजी और एक ऐजेंसी का रिपोर्टर था। वह सब जानते थे कि दीपा मुझे अच्छी तरह से जानता है। उन्होंने मुझे कहा कि क्यों न टीम के कोच जाॅन राइट से बात करें कि हमें सुबह मीडिया से बातचीत की जानकारी नहीं थी। मेने दीपे को यह बात कही। उसने जाॅन राइट से कहा कि कुछ मीडिया के लोग आपसे बात करना चाहते थे। उसी दौरान जाॅन राइट पालम के पवेलियन में आ गए। मेरे अग्रेजी के मित्र ने जाॅन से बात की तो उसने कहा कि बडा मुश्किल है, क्योंकि मीडिया से बातचीत हो गई है। फिर भी अगर सचिन बात करे तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।
बस इसी बात को लेकर मैनें दीपे को कहा कि वह सचिन को बताए कि कोच जाॅन राइट से हमारी बात हो गई है, उन्होंने आप पर छोडा है। यह संदेश दीपे ने सचिन को पहुंचा दिया। हम करीब आधे घंटे पालम पवेलियन के पास उदास होकर खडे रहें होंगे कि दीपा मुझे ढूढंते हुए आया और कहा कि सचिन ने कहा है कि नैटस से पवेलियन तक ही वह बात करेगा। यह हमारे लिए संजीवनी बूटी की तरह था। बस हम सबने आपस में बात की कि छोटे-छोटे कदम और छोटे-छोटे सवाल करेंगे, ऐसा हुआ भी। दीपे ने सचिन का किट बैक लगाते हुए हमें बुलाया और हम तेजी से सचिन के पास पहुंचे तथा सचिन हमारे साथ अपनी चाल की तरह चलने लगा, मगर हम धीरे-धीरे आगे बढे,शायद सचिन समझ गए कि हम धीरे चल रहें है। वह भी धीमे चले बडे ही आराम से सवालों के जवाब देने लगे। ऐसे में नैट से पवेलियन तक जीतना भी समय मिला हमारा एक अच्छा खास इंटरव्यू बन गया। वहीं सचिन ने पवेलियन आते ही हमें थैक्यू कहकर रवाना कर दिया।
अगले दिन हम सभी ने अपने-अपने नाम से सचिन का इंटरव्यू लगाया तो अन्य पत्रकार हैरान हो गए कि यह कब और कैसे हो गया। हमने उनका सारा किस्सा बताया।
इससे बाद मुझे लगा कि सचिन कितना सहज दिल वाला खिलाडी है। कहते भी यहीं है कि फल देने वाला पेड हमेशा झुका होता है। यह सचिन पर पूरी तरह से फिट बैठता है।
प्रस्तुति- विजय कुमार

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