करोड़ों का फंड पाने वाली स्कूल गेम्स फेडरेशन नहीं मानता खेल मंत्रालय के नियमों को

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  • करोड़ों का फंड पाने वाली स्कूल गेम्स फेडरेशन नहीं मानता खेल मंत्रालय के नियमों को।
  • मान्यता रदद होने पर भी पत्रों में दावा खेल मंत्रालय से मान्यता का।
  •  स्कूल गेम्स फेडरेशन में एक ही व्यक्ति महासचिव और सीईओ भी।
  • सरकार का नियम एक व्यक्ति एक पद पर कार्य कर सकता है। मगर सरकार की मिली भगत से हो रहा है सारा काम।

विजय कुमार ( नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2020 ): कहते है कि किसी भी संस्था को आगे बढाने के लिए उसे नियमों पर चलाना होता है। मगर जब संस्था ही नियमों को ताक पर रख दे तो उसका क्या होगा! ऐसा देखने को मिला है देश में स्कूली खेलों को बढावा देने का दावा करने वाली संस्था स्कूल गेम्स फेडरेशन एसजेएफआई का।
स्कूल गेम्स फेडरेशन को सरकार व राज्यों सरकारों से करोडों का फंड मिलता है। यह फंड उसको खेल मंत्रालय की मान्यता के उपरंात स्कूली खेलों को आगे बढाने के नाम पर दिया जाता है। लेकिन स्कूल गेम्स फेडरेशन भारत सरकार के खेल मंत्रालय के नियमों को तो मानता ही नहीं है।

इसी के कारण बीते साल दिसंबर 2019 में खेल मंत्रालय ने स्कूल गेम्स फेडरेशन की मान्यता नियमों के तहत कार्य ना करने पर समाप्त कर दी थी। स्कूल गेम्स फेडरेशन को खेल मंत्रालय ने कहा था कि वह अगर उसके बनाए नियमों के तहत कार्य नहीं करेगी तो उनकी मान्यता हमेशा के लिए भी जा सकती है।

इसके बावजूद स्कूल गेम्स फेडरेशन तो खेल मंत्रालय को कुछ समझता ही नहीं है। स्कूल गेम्स फेडरेशन अपने से मान्यता राज्य एवं इकाईयों को भेजे जाने वाले पत्रों में खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त होने का दम भरते हुए पत्र भेज रहा है। ऐसा ही एक पत्र उसने फरवरी 2020 में स्कूली हाकी टूर्नामेंट को लेकर भेजा।

स्कूल गेम्स फेडरेशन के पदाधिकारी यहीं नहीं रूकते। इस भेजे पत्र में फेडरेशन के महासचिव और सीईओ एक ही व्यक्ति को दिखाया गया है। इससे साफ है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन में कुछ तो घोटाला है। जहां राजेश मिश्रा ही उक्त दोनों पदो पर काबिज है। जबकि सरकार के नियमों में एक व्यक्ति एक ही पद पर रह सकता है। लेकिन यह माजरा स्कूल गेम्स फेडरेशन के पत्रों में साफ देखने में मिल जायेगा।

मज़ेदार बात तो यह है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन के हर कार्यक्रम की जानकारी खेल मंत्रालय को भी भेजी जाती है। लेकिन वहां भी बैठे आला अधिकारी इस पर कोई कार्यवाहीं नहीं करते। बल्कि बताया है भी जा रहा है कि स्कूल गेम्स फेडरेशन का सारा धंधा ही खेल मंत्रालय में बैठे कुछ अधिकारियों के सहयोग से चलता है। वरना क्या कारण है कि दिसंबर में मान्यता रदद होने के बावजूद स्कूल गेम्स फेडरेशन अपने पत्रों में खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त लिखकर भेज रहा है।

इस बाबत स्कूल गेम्स फेडरेशन के अध्यक्ष ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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