बुद्धत्व की प्राप्ति व महापरिनिर्वाण का दिन -वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा

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डॉ.जगदंबा सिंह।

छठी शताब्दी के मध्य गंगा की घाटी में बौद्ध धर्मावलंबी महात्मा बुध का जन्म 7 मई दिन गुरुवार लुंबनी वर्तमान नेपाल की तराई में हुआ था महात्मा बुध का जन्म ज्ञान की प्राप्ति और महा – परिनिर्वाण तीनों एक ही दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए थे ! इसे बुद्धपूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है इस दिन को बौद्ध धर्मावलंबी महात्मा बुद्ध की जयंती के रूप में भी मनाते हैं !महात्मा बुद्ध को बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति के बाद वे बुद्ध कहलाए ! बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बोधगया पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है ! इस धर्म के अनुयायियों के लिए बुदॄ पूर्णिमा सबसे बड़ा त्यौहार का दिन है इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए जाते हैं!
महात्मा बुद्ध के अनुयायी बुद्धम शरणं गच्छामि , धम्मं शरणं गच्छामि संघं शरणं गच्छामि मे विश्वास करते थे और उनके बताए हुए त्रि- मार्ग का पालन करते थे ! महात्मा बुध का लालन-पालन राजसी ठाठ- बाट से हुआ था लेकिन सांसारिक सुख सुविधाओं मे उनका मन नहीं लगा और उन्होंने गृह त्याग कर सन्यासी के जीवन को अपनाया !और वषो॓॔ तक ज्ञान की प्राप्ति में इधर-उधर भटकते रहे और ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया धर्म ग्रंथों में से धम्मचक्र प्रवर्तन की संज्ञा दी गई! अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं! इस संसार में ऐसा कोई महापुरुष अभी तक अवतरित नहीं हुआ जिसका जन्म, ज्ञान की प्राप्ति , महापरिनिर्वाण तीनों एक ही दिन हुए हो !आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में लाखों-करोड़ों से अधिक लोग हैं तथा बुद्ध पूर्णिमा को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं! यह त्यौहार भारत देश के अतिरिक्त चीन, नेपाल, वियतनाम, श्रीलंका, म्यांमार ,पाकिस्तान आदि तथा विश्व के अनेक देशों में मनाया जाता है !बुदॄ की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित है, इस स्थान पर एक माह का मेला लगता है इस बिहार का महत्व बुद्ध के महापरिनिर्वाण से है इस मंदिर का स्थापत्य कला अजंता की गुफाओं से प्रेरित है! इस विहार में भगवान बुद्ध की लेटी हुई भू- स्पर्श मुद्रा में मूर्ति है जो लाल बलुई की बनी हुई है बिहार के पूरब हिस्से में एक स्तूप है यहां पर महात्मा बुदॄ का अंतिम संस्कार हुआ था ! विश्व भर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएं करते हैं! और इसी दिन बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है, बोधिवृक्ष की पूजा की जाती है ,महात्मा बुध कहा करते थे कि जो कुछ भी तुम्हारा नहीं है उसे जाने दो ऐसा करके तुम्हें लंबी खुशी और लाभ प्राप्त होगा ! सुख, शांति और समाधान श्रद्धा और अहिंसा के दूत महात्मा बुद्ध को आज तहे दिल से प्रणाम करते हैंं।

(लेखक प्राचार्य एलिट पब्लिक बीएड कॉलेज में प्राचार्य हैं)

 

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